SOURABH SONONE
HELLOOO HAVE A GRATE DAY
Thursday, August 18, 2011
ANNA HAJARE
jab tak sarkar anna hazare ji ki conditions par agree nahi hogi tab tak ye naara chalta raheega.......anna hazare ji aage baro ham aapke saath hain....vande matram....aaj to sarkar ko jhukna hi hoga kyuki duniya janti hain sach aur jhoote logo mai jeet hamesa sachai ki hoti hai aur ab waqt aa gaya hai sakbhi correpted logo ko samne lane ka.aur apne desh ko aur corrept hone se bachane ka....to jitne bhi correpted log hai apni ulti ginti start kar le.......jai hind
Saturday, April 9, 2011
अन्ना हजारे के साथ बॉलीवुड
अन्ना हजारे के साथ बॉलीवुड
बॉलीवुड की हस्तियों ने प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के प्रति समर्थन जाहिर किया है.
हजारे एक कठोर लोकपाल विधेयक की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं.
लोकपाल विधेयक-2010 में प्रधानमंत्री, मंत्रियों व सांसदों के खिलाफ लोकायुक्त के यहां भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराने का प्रस्ताव है. लेकिन अन्ना हजारे का कहना है कि लोकपाल विधेयक के वर्तमान रूप में लोकायुक्त को कोई अधिकार नहीं है और उनके समर्थकों ने एक दूसरा जन लोकपाल विधेयक तैयार किया है. जिसमें समाज एवं आम आदमी के विचारों व सुझावों को ध्यान में रखा गया है. अन्ना के समर्थक इसी विधेयक को पारित करवाना चाहते हैं.
बॉलीवुड की जिन हस्तियों ने अन्ना के प्रति अपना समर्थन जाहिर किया है, वे निम्न प्रकार हैं.
अनुपम खेर : जब कोई व्यक्ति भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहा होता है तो मैं उसके तरीकों पर कोई सोच-विचार नहीं करता. मैं उसके इरादों व कार्रवाइयों की सराहना करता हूं. मैं अन्ना हजारे के साथ हूं. क्या आप भी है?
शेखर कपूर : मैं लोकपाल विधेयक पर राष्ट्रीय बहस कराए जाने के लिए अन्ना हजारे के अनशन का समर्थन करता हूं. कम से कम संसद आगे आए और इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दे. अन्ना हजारे जैसे लोग व्यवस्था के खिलाफ जनांदोलन का दबाव बनाएंगे, जिस तरह गांधी ने अंग्रेजों के खिलाफ किया था.
राहुल बोस : व्यवस्था परिवर्तन के लिए अन्ना हजारे का आमरण अनशन अपने आप में पर्याप्त टिप्पणी है. भ्रष्ट्राचार हमारे डीएनए का हिस्सा है.
दिया मिर्जा : अंतत: लोग एक ऐसे व्यक्ति के लिए अपना जोरदार समर्थन दे रहे हैं, जो हमारी पीढ़ी के लिए एक महान उदाहरण है, होना चाहिए और होगा. मैं अन्ना हजारे का समर्थन करती हूं.
जूही चावला : मैं श्री अन्ना हजारे की पूर्ण एवं अंध समर्थक हूं.
पूरब कोहली : जियो 'हजारे' साल 'अन्ना साहेब'.
मधुर भंडारकर : भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे की लड़ाई के लिए व्यापक समर्थन तैयार हो रहा है. कहीं भारत अगला मिस्र तो नहीं बनने जा रहा?
प्रीतीश नंदी : अन्ना हजारे के समर्थन में आम आदमी को आते देखकर गर्व होता है. 72 वर्षीय इस व्यक्ति ने हमें जगाने के लिए आमरण अनशन का निर्णय लिया है.
रणवीर शौरी : अन्ना हजारे का धर्मयुद्ध इस बात की महान अग्निपरीक्षा है कि क्या देश में कुछ चरित्रबल बचा है, या हम बिल्कुल भ्रष्ट लोगों का देश बन गए हैं.
अन्ना हजारे की लड़ाई का बॉलीवुड के अभिनेता अमिताभ बच्चन ने यह कहते हुए समर्थन किया है कि वह देश हित वाले सभी मुद्दों के साथ हैं।
अमिताभ ने मीडिया से भी अपील की है कि वह इस उद्देश्य के लिए प्रतिबद्धता प्रदर्शित करे। अमिताभ ने अपने ब्लॉग पर लिखा है, देश के हित के किसी भी मुद्दे का मैं हमेशा समर्थन करता हूं। कोई भी काम या योजना जो देश के हित में होती है, उसकी हम सराहना करते हैं.. और हम इसका ढिंढोरा नहीं पीटना चाहते.. और न ही हमें इसका ज्ञान है कि इसे पीटा कैसे जाता है।
अमिताभ की पोस्ट पर आई एक प्रतिक्रिया से आहत महानायक ने कहा, यह जानना दुखद है कि बिना मेरा पक्ष जाने, उस महिला ने ऐसे तथ्य मान लिए, जिनका अस्तित्व ही नहीं था। यह कहना कि मैं व्यस्त हूं, सिर्फ पैसे कमाने से मतलब रखता हूं और सामाजिक सरोकारों के मुद्दों में मेरी कोई रुचि नहीं है, पूरी तरह अस्वीकार्य और गलत है। उन्होंने सवाल किया, कितने चैनल ऐसे हैं, जो इसके लिए प्रतिबद्ध हैं।
अमिताभ ने चैनलों से जवाब मांगते हुए कहा, सिर्फ अपने व्यावसायिक लाभ के लिए रिपोर्ट तैयार करना और दूसरों से जवाब मांगना पर्याप्त नहीं है। अगर कोई चैनल का स्ट्रिंगर, जो वहां रिपोर्ट तैयार करने जाए और वहां माइक्रोफोन और रिपोर्टिंग छोड़ कर अनशन करने बैठ जाए, तो यह बात प्रभावित करेगी, कुछ ऐसा करें, जो करने के लिए यह हमसे कहते हैं।
Sunday, July 11, 2010
Saturday, July 10, 2010
Computer Wonder

वैसे तो ऐबेकस के रूप में सदियों से कैलकुलेटर जैसा एक औजार था, लेकिन डाटा स्टोरिंग की मशीन किसने बनाई? पेटेंट दफ्तर में इस सिलसिले में चार्ल्स बैबेज का नाम दर्ज है। वे इंगलैंड के थे और उन्नीसवीं सदी में ही उन्होंने इसके शुरुआती सिद्धांत बनाए थे। लेकिन जर्मनी के कॉनराड त्सूजे ने पहली बार 1941 में एक मशीन तैयार की, जिसे आज के कंप्यूटर का जनक कहा जा सकता है। इसमें बस 64 शब्द स्टोर किए जा सकते थे। त्सूजे इतना ही चाहते थे कि उन्हें किसी तरह हिसाब के झमेले से निजात मिल जाए।
1992 में इस सिलसिले में उन्होंने कहा था, 'मैंने सिविल इंजिनीयरिंग की पढ़ाई की थी। सिविल इंजिनीयर को हिसाब लगाने होते हैं, जिनमें काफी माथापच्ची करनी पड़ती है। मैं चाहता था कि ये हिसाब ऑटोमेटिक ढंग से हों, फिर मुझे एक तरीका सूझा और यह मशीन बनी, जिसे हम आज कंप्यूटर कहते हैं। आप कह सकते हैं कि मेरे पेशे की मजबूरी से इसका जन्म हुआ।
1938 में त्सूजे ने जेड 1 नाम की जो मशीन तैयार की, उसमें चारों ओर छड़ों और हैंडिलों की भरमार थी। यह प्रयोग के लिए एक मॉडल था और इसमें अभी बहुत सी खामियाँ थीं। इसके बाद उन्होंने जेड 2 नाम का एक और मॉडल तैयार किया, जिसमें एक टेलीफोन रीले सिस्टेम था। फिर 1941 में तैयार हुआ दुनिया का पहला कामकाजी कंप्यूटर जेड 3 यह देखने में एक विशाल अलमारी जैसा था और इसमें 600 टेलीफोन रीले सिस्टेम शामिल थे। आज इस मशीन को म्युनिख के जर्मन संग्रहालय में रखा गया है। हाइंत्ज मोएलर यहाँ दर्शकों को जेड 3 की बारीकियों का परिचय देते हैं और उनके सवालों का जवाब देते हैं।
वे कहते हैं- लोग इस मशीन के सामने खड़े रहते हैं और हैरत से इसे देखते रहते हैं। उन्हें समझ में नहीं आता कि यह क्या है। काफी दिलचस्प सवाल भी पूछे जाते हैं। अभी पिछले हफ्ते एक कंप्यूटर प्रेमी ने मुझसे पूछा कि क्या इसे इंटरनेट से जोड़ा जा सकता है? मैंने उनसे कहा, क्यों नहीं, अगर आपके पास बूट करने के लिए 28 हजार साल का वक्त हो।
कॉनराड त्सूजे ने सिर्फ वही नहीं तैयार किया, जिसे आज की भाषा में हार्डवेयर कहते हैं। उन्हें एक प्रोग्राम, यानी सॉफ्टवेयर भी तैयार करना पड़ा, ताकि कंप्यूटर काम कर सके। उनकी भाषा में हिसाब की प्रणाली। इसमें पंच सिस्टेम के जरिए निर्देश व संख्याएँ दी गई थीं, जिनके आधार पर यह मशीन काम करती थी।
म्युनिख संग्रहालय में जेड 3यह नाजियों का जमाना था, द्वितीय विश्वयुद्ध चल रहा था। हालाँकि त्सूजे ने नाजी सरकार के निर्देश पर इसे तैयार नहीं किया था, लेकिन युद्ध में इस्तेमाल के लिए उन्होंने अपना आविष्कार मुहैया कराया था। नए विमान तैयार करने के लिए या दूसरे पक्ष की सूचनाओं को डिकोड करने के लिए इसे काम में लाया जा रहा था।
त्सूजे सिर्फ अपने आविष्कार में मगन थे। पीछे मुड़कर देखते हुए बाद में उन्होंने कहा था, 'उस समय मेरे सामने सवाल यह था कि कैसे इस तरह की मशीनों को विकसित करते हुए विश्लेषण का काम आगे बढ़ाया जा सकता है। सेना के लोगों से भी मेरी बाते हुई थीं, लेकिन उनके पास एनिग्मा नाम की मशीन थी, जो उस दौर के हिसाब से कापी अच्छी थी।'
विश्वयुद्ध खत्म होने के बाद जर्मनी को कंप्यूटर नही, दूसरी चीजों की जरूरत थी। लेकिन कॉनराड त्सूजे अपने रास्ते पर बने रहे।
कॉनराड त्सूजे कहते हैं, 'मेरे लिए यह बात साफ थी कि मैं संगणन की एक नई दुनिया में कदम रख रहा हूँ और मेरी राय में ऐलगोरिदम की भाषा तैयार करने के लिए शतरंज का खेल एक इलाका हो सकता था। मिसाल के तौर पर 1938 में अपने दोस्तों के बीच मजाक करते हुए मैंने कहा था कि पचास साल के अंदर एक मशीन शतरंज के विश्वचैंपियन को हरा देगी। अफसोस कि ऐसा नहीं हुआ, लेकिन रास्ता बिल्कुल सही था।'
1940 से ही कॉनराड त्सूजे की अपनी कंपनी थी, त्सूजे अप्पाराटेनबाऊ, जो 1964 में दीवालिया हो गई। लेकिन इससे भी ज़्यादा अफसोस उन्हें इस बात का था कि पेटेंट दफ्तर में उनकी दरख्वास्त खारिज कर दी गई। उनका कहना था कि यह फैसला सही नहीं था।
कंपनी दीवालिया हो जाने के बाद वे कलाकार बन गए। लेकिन यहाँ भी कंप्यूटर ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। वे कंप्यूटर की दुनिया के दिग्गजों की ऑयल पेंटिंग बनाने लगे। 1995 में अपनी मौत से कुछ ही माह पहले उन्होंने बिल गेट्स को उनकी एक तस्वीर भेंट की। सीएट्ल में माइक्रोसॉफ्ट के मुख्यालय में बिल गेट्स के दफ्तर में आज भी यह तस्वीर टंगी हुई है।
Tuesday, April 28, 2009
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